मंगलवार, 23 दिसंबर 2008


एक किताब हो मोहब्बत की ...



हमारे एक ब्लॉगर साथी ने पूछा है के:
तुमने "पागल लड़की" को मशूरा तो दे दिया, मगर उससे यह भी पूछा के उसने ख्वाब देखा या कोई दुआ मांगी थी?
चलिए .... उसी "पागल आंखों वाली लड़की" से ही पूछ लेते हैं ...
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एक अजीब सी ख़ाहश लिख बैठी हूँ

जी में है
के
एक किताब हो मोहब्बत की
जिसका नाम तमन्ना हो
बाब हो उसके उतने ही
जितनी मेरी उम्र हो

जिसके हर सफ्हे पे रखे
ख़ाहशों के फूल हो
ख़ाहशें भी ऐसी
जिस में एक तमसील हो

उस तमसील में सर ता पा
मेरी अपनी ही तकमील हो

मेरे साहर
मोहब्बत की उस किताब में
ऐसा कुछ तुम भी लिखो
जो किसी ने अबतक लिखा ना हो

सुनो
मेरी जान !
मैं तो एक अजीब सी
खाहिश लिख बैठी हूँ
अपने रब से तुम्हें
सिर्फ़
एक दिन के लिए मांग बैठी हूँ

मेरे साहर
मेरा यक़ीन कहता है
तुम्हारे साथ एक दिन में
कई जन्मों का सफ़र रहेगा !!

बाब = chapter
तमसील = मिसाल (example)
सर ता पा = सर से पैर तक
तकमील = completeness
साहर = जादूगर


poetess = निगहत नसीम

1 टिप्पणी:

विनय ने कहा…

बहुत बढ़िया, भई, संवेदनशील

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