गुरुवार, 16 अक्तूबर 2008


वह क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नही होता


बी बी सी - हिन्दी ने यहाँ एक ख़बर दी है के आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद ज़िले के एक गाँव में कुछ अज्ञात लोगों ने एक ही घर के छह लोगों को ज़िंदा जला दिया.

हमारा मानना है के दहशत-गर्दी का कोई मज़हब नही होता. हर मज़हब में बे-वजह का क़त्ल एक बहुत बड़ा जुर्म है. क़ुरान शरीफ़ में तो साफ़ लिखा है के :
जिस ने एक इंसान को क़त्ल किया उसने सारी इंसानियत को क़त्ल किया !

लेकिन बड़ा दुःख इस बात का होता है के हमारे हिन्दुस्तानी media को ........
नानो कार और गुजरात याद रहता है
अमिताभ बच्चन की बीमारी बड़ा परेशान करती है
राखी सावंत के आंसू दिखायी ज़रूर देते हैं
एक मासूम बच्चे को बोर-वेल से निकालने की रन्निंग कमेंट्री देना याद रहता है
बस याद नही रहता तो .....................

क्या कीजिये साहेब, किस से शिकवा कीजिये? खून-ऐ-मुस्लिम इतना ही सस्ता है आज के भारत में .....

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वह क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नही होता !!

6 टिप्‍पणियां:

डॉ.सुभाष भदौरिया. ने कहा…

हैदराबादी साहब,
मासूमों को ज़िन्दा जलाने वाले कौन हैं ? बदमाश सियासत के सफेद पोश लोगों की नाजाइज़ औलादें.
हम मासूमों की मौतपर आँसू बहा कर तस्कीन न करें उनके बापों का इलाज़ भी करें.
माना कि उन तक पहुँचना मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं.
वे हमें आपस में लड़ा कर अपना मकसद पूरा कर रहे हैं हम आपस में उलझकर इक दूसरे के खूँन के प्यासे बने हुए है बे अक्ल हिन्दू और मुस्लमानों को ये बात जाने कब समझ में आयेगी.
पर जिस दिन आगयी उस दिन इन वतन के गद्दारों को वे नहीं बख्शेंगे हम चाहते है वो वक्त ज़ल्द आये.आमीन.

Tarun ने कहा…

मीडिया के लिये सही कहा, लेकिन जिसने भी ये किया उनको कुछ ऐसी सजा मिलनी चाहिये कि आइंदा कोई ऐसा करने की सोचे भी ना। चंद लोग हैं जो इस तरह की हरकतों से अमन चैन और भाईचारा बिगाड़ना चाहते हैं।

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

दोषियों को सरेआम फांसी पर लटकाया जाना चाहिए...

Suresh Chiplunkar ने कहा…

मैं भी आपको ऐसी हजारों तस्वीरें भेज सकता हूँ जिसमें कश्मीर में हिन्दुओं का गला रेता जा रहा है या मालेगाँव, मुम्बई या मेरठ के दंगों की खतरनाक तस्वीरें… खामख्वाह भड़काने वाली पोस्ट लिखकर हिट होने की कोशिश न कीजिये… बच्चों की तस्वीरें दिखाकर आप क्या साबित करना चाहते हैं? क्या इस प्रकार हजारों बच्चे असम में बांग्लादेशियों के कारण अनाथ नहीं हुए हैं? यह पूरी तरह से एकतरफ़ा और भड़काने वाली पोस्ट है… यदि आपने मोडरेटर लगाया हो तो इस टिप्पणी को भी जगह दें… गाली देना हो तो कांग्रेस को दीजिये जिसकी नीतियों के कारण आज देश बर्बादी के रास्ते पर है…

डॉ.सुभाष भदौरिया. ने कहा…

सुरेश चिपलूकर सारे हिन्दुत्व के ठेकेदार मत बनो.
बच्चे बच्चे हैं और बच्चों पे बहादुरी दिखाने वाले किसी भी कौम के हों निंदनीय हैं.
किसने रोका है आतंकवादियों के किलों को ध्वस्त करने से कांग्रेस के पहले कौन थे जो बादल गरज भी सकते हैं बरस भी सकते हैं कह कर आत्म रत रहे कुछ न कर सके. दामाद की तरह खातिरदारी कर सेफ पैकेज़ किस ने दिया था संसद पे हमला हुआ था तब किस की सरकार थी क्यों सख्त कार्यवाही नहीं की गयी मात्र कांग्रेस को दोष देकर किस के गुणगान में लगे हो भक्तराज.
जैसे सांपनाथ वैसे नागनाथ सभी डस रहे हैं.
आतंकी भी कम बुज़दिल नहीं वे भी निरीह लोगों की ही हत्या करते हैं मात्र सोफ्ट टार्गेट ही हलाक किये जाते हैं दोनों पक्षों के.
जिन्हें मास्टर माइन्ड आतंकवादी कहा जाता है मुझे तो उनके माइन्ड होने पर शक होता है.अगर उनके माइन्ड ही होता तो वे सड़को पर बोम्ब नहीं रखते.
और आप हिट लेने की क्या बकवास किया करते हो
ये काम तुम लोग कर रहे हो.

ब्लाग पर भी हिन्दुस्तान पाकिस्तान बना डाला तुम लोगों ने.
कभी कश्मीर में जाओ तो सही, आसाम में गुहावटी से आगे बढो तो पता चलेगा. बनने की कोशिश मत करो.
सेना का हमेशा ट्रिगर पर हाथ रहता है 24 घंटे दहशत मैनें आर्मी के लोगों में देखी है उनके साथ रहा हूँ पिछली साल 14 दिन तक. वे भी बुज़दिल शासकों से परेशान हैं क्या करें.
कोई भी ठोस निर्णय नही लेता कुर्षी हाथ आने पर सब अमन का राग आलापने लगते हैं.
धिक्कार है.
नेता तो हमेशां कमांडो से घिरे रहते हैं बदमाशों ने निरीह लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया है.

Hyderabadi ने कहा…

डॉ.सुभाष भदौरिया:
डॉ. साहब, यह बात आप ने बिल्कुल सच कही के ;
वे हमें आपस में लड़ा कर अपना मकसद पूरा कर रहे हैं हम आपस में उलझकर इक दूसरे के खूँन के प्यासे बने हुए है
इसकी मिसाल आप यहीं suresh साहब की टिप्पणि में देख सकते हैं

Tarun:
भाई Tarun, मैंने मीडिया की ही शिकाएत की है इस पोस्ट में

फ़िरदौस ख़ान:
काश के आप के मशोरे पर अम्ल हो सके. मगर मसला यही है के दोषियों के पीछे बदमाश सियासत के सफेद पोश लोग हैं , बक़ौल डॉ. साहब के.

Suresh Chiplunkar:
भाई Suresh, मैं हिट होने की कोशिश नही कर रहा बलके जो पहली बार देखा और पढ़ा है उसके मुतल्लिक़ लिखा है. मैं एक लंबे period से अपने मुल्क से बाहेर हूँ और जब पहली बार मैंने मीडिया की ऐसी partiality देखि तो लिखे बगैर ना रह सका. बाक़ी आप ने जो भी बातें लिखी हैं उसका बेहतर जवाब डॉ. साहब आपको दे चुके हैं.