भारत की कर्रंसी (currency) का प्रतीक (symbol) आख़िर कार डिजाईन हो गया है.
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मंगलवार, 20 जुलाई 2010
शनिवार, 2 जनवरी 2010
स्वागत 2010
नया साल आया है
वीरान सुबह के नीले आसमाँ से उभरता
ठिठरती खमुशी में बर्फ़ीली सीटी बजाता
दबे पाऊँ आया
ठंडी शामों की खमुशियाँ
उसके क़दमों की आहट समेटे
रास्तों में, साएबानों में सिसक रही हैं
निकल आती है शब् को दरीचों की छिदों से
पुरजोश झोंकों की बेतहाशा ठंडक
ठन्डे पानियों के परिंदे
किनारे पर खड़े पेड़ों की नमनाक शाखों की तरफ उड़े जा रहे हैं
आंगनों में , छतों पर खड़े लोग
धड़कते दिलों में हज़ारों खाहिशों की शमें जलाए
दबे पाऊँ आते हुए साल को देखते हैं !!
रविवार, 6 दिसंबर 2009
शनिवार, 15 अगस्त 2009
यौम-ऐ-आज़ादी-ऐ-हिंद मुबारक !!
यौम-ऐ-आज़ादी-ऐ-हिंद आप तमाम दोस्तों को मुबारक हो !!
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलसिताँ हमारा ॥
ग़ुर्बत मे हो अगर हम रहता है दिल वतन मे
समझो वहीं हमे भी दिल है जहाँ हमारा ॥
परबत वो सब से ऊंचा हमसाया आसमाँ का
वो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा ॥
गोदी मे खेलती है इसकी हज़ारों नदिया
गुलशन है जिनके दम से रश्क-ए-जनाँ हमारा ॥
ऐ आब ए रौद ए गंगा वो दिन है याद तुझको
उतरा तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा ॥
मज़हब नही सिखाता आपस मे बैर रखना
हिन्दी है हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा ॥
युनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमा सब मिट गये जहाँ से
अब तक मगर है बाक़ी नामो-निशान हमारा ॥
कुछ बात है के हस्ती मिटती नही हमारी
सदियो रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा ॥
इक़्बाल! कोइ मेहरम अपना नही जहाँ मे
मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा ॥
रविवार, 28 जून 2009
अमावस की रात

शाम होते ही सितारे और हम
एक ही चीज़ को ढूंढते हैं हम
दोनों के चहरे पर उदासी है
एक सा लगता है दोनों का ग़म
वह तो हैं आसमान में सरगर्दां
और सफ़र करते हैं ख़याल में हम
तारों के साथ बहुत तारे हैं
हम सफ़र में हैं अकेले एकदम
चाँद के हैं तलाश में तारे
और चंदा को ढूंढते हैं हम
चाँद को पा के थम गए तारे
पर मेरी फ़िक्र जाए कैसे थम
तारों के चहरे पर ख़ुशी लौटी
आँख नय्यर की रहेगी पुर नम
poet = फ़हीम नय्यर
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